नोएडा के फेज-दो क्षेत्र के सी ब्लॉक निवासी अधिवक्ता सत्यनारायण द्विवेदी ने बिल्डर कंपनी और उससे जुड़े 11 लोगों के खिलाफ अदालत के आदेश पर धोखाधड़ी, धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। पीड़ित का आरोप है कि विला के लिए भूखंड देने के नाम पर उनसे धोखाधड़ी की गई, जिससे उन्हें लाखों रुपये का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ा। पुलिस ने कोर्ट के निर्देश पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला जेपी ग्रींस टाउनशिप प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां विश्वस्तरीय सुविधाओं का वादा कर निवेशकों को आकर्षित किया गया था। विला प्लॉट खरीदने के बाद सामने आई प्लान की गड़बड़ी पीड़ित अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने मार्च 2020 में ग्रेटर नोएडा स्थित जेपी ग्रींस परियोजना में स्पोर्ट्स विला खरीदा था। उन्हें आवंटन पत्र और सब लीज डीड भी मिल गई, जिसके बाद भूखंड का कब्जा भी दे दिया गया। आरोप है कि कंपनी से जुड़े लोगों ने उन्हें एक बिल्डिंग प्लान दिखाकर निर्माण शुरू कराने को कहा। लेकिन जब निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो पता चला कि दिखाया गया नक्शा प्राधिकरण से स्वीकृत ही नहीं था। इस वजह से उन्हें दोबारा नक्शा तैयार कराना पड़ा, जिससे करीब 46.82 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च हो गया। दोबारा मंजूरी मिलने पर निर्माण में किया गया हस्तक्षेप पीड़ित ने बताया कि जनवरी 2024 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से नया नक्शा स्वीकृत कराने के बाद जब उन्होंने निर्माण कार्य शुरू कराया तो कुछ आरोपियों ने जमीन पर अतिक्रमण कर दिया। विरोध करने पर कथित रूप से निर्माण कार्य रुकवा दिया गया और मजदूरों को भी रोककर रखा गया। पीड़ित का आरोप है कि जब वह बिल्डर के कार्यालय शिकायत लेकर पहुंचे तो हेल्प डेस्क कर्मचारियों ने उन्हें धमकाकर भगा दिया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां से पुलिस को केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए। कोर्ट आदेश के बाद पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद बिल्डर कंपनी और उससे जुड़े नामजद 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अब दस्तावेजों और पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इसी तरह अन्य खरीदार भी प्रभावित तो नहीं हुए। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।