चैत्र नवरात्रि प्रथम दिवस: मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व, जानें कथा, पूजा विधि, भोग और मिलने वाले वरदान

ज्योतिष, NewsAbhiAbhiUpdated 18.03.26 IST
चैत्र नवरात्रि प्रथम दिवस: मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व, जानें कथा, पूजा विधि, भोग और मिलने वाले वरदान

 चैत्र नवरात्रि प्रथम दिवस: मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व, जानें कथा, पूजा विधि, भोग और मिलने वाले वरदान

 
चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से प्रारंभ हो रहा है। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। यह दिन नई शुरुआत, स्थिरता, ऊर्जा और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन प्रतिपदा तिथि पर विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और सुख, समृद्धि, आरोग्य तथा पारिवारिक खुशहाली की कामना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन का शुभ रंग
नवरात्रि में प्रत्येक दिन का एक विशेष रंग माना जाता है। मां शैलपुत्री की पूजा के दिन सफेद रंग धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सफेद वस्त्र पहनने से मन और आत्मा दोनों शुद्ध होते हैं और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री पूर्व जन्म में सती के रूप में प्रकट हुई थीं, जो भगवान शिव की अर्धांगिनी थीं। उनके पिता दक्ष प्रजापति द्वारा शिव का अपमान किए जाने पर सती ने यज्ञ अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। अगले जन्म में उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया, जिससे उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। कठोर तपस्या के बाद उन्होंने पुनः भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। नवरात्र में यह मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है।
 
मां शैलपुत्री का स्वरूप
मां शैलपुत्री वृषभ पर विराजमान होती हैं। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प होता है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनका स्वरूप शांति, सौभाग्य और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। उनकी आराधना से जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास का विकास होता है।
प्रिय भोग और अर्पण
मां शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। उन्हें सफेद फूल, खीर, मखाने की खीर तथा गाय के शुद्ध घी से बने मिष्ठान्न अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन कन्याओं को प्रसाद वितरित करने का भी विशेष महत्व है।
 
मां शैलपुत्री के मंत्र
मां की कृपा प्राप्त करने के लिए “ॐ शं शैलपुत्री देव्यै नमः” मंत्र का जप करना फलदायी माना जाता है। साथ ही “या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता” स्तुति का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है।
मिलने वाले वरदान
मां शैलपुत्री की कृपा से व्यक्ति को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही वे मानसिक शांति, आत्मबल, दृढ़ निश्चय और एकाग्रता प्रदान करती हैं। उनकी आराधना से भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
 
पूजा विधि – मां शैलपुत्री की आराधना कैसे करें?
प्रातः स्नान और वस्त्र धारण – सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे सफेद वस्त्र पहनें।
 
कलश स्थापना – शुभ मुहूर्त में लाल कपड़ा बिछाकर चौकी पर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर रखें। वेदी पर मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं और कलश स्थापित करें।
अखंड ज्योति प्रज्वलित करें – मां शैलपुत्री के समक्ष अखंड दीपक जलाएं।
 
गणेश पूजन – पूजा की शुरुआत गणेश जी का आह्वान कर चंदन, फूल और तिलक अर्पित करके करें।
मां शैलपुत्री का आह्वान – हाथों में लाल पुष्प लेकर देवी का ध्यान करें।
शृंगार और अर्पण – माता को कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, धूप, गंध और फूल अर्पित करें।
मंत्र जाप – देवी के मंत्र और स्तोत्र का ध्यानपूर्वक जाप करें।
 
आरती और शंखनाद – घी का दीपक जलाकर आरती उतारें और शंख-घंटी बजाकर वातावरण को पवित्र करें।
प्रसाद – मां शैलपुत्री को दूध से बनी खीर या मीठे व्यंजन अर्पित करें और फिर भक्तों में बांटें।
 
क्षमा याचना – पूजा के अंत में मां से भूल-चूक की क्षमा मांगें।
पाठ – इच्छानुसार दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

Recommended

Follow Us