कांग्रेस में मतभेद, शशि थरूर और मनीष तिवारी ने पश्चिम एशिया नीति पर केंद्र का किया समर्थन
नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी लगातार केंद्र सरकार की आलोचना कर रही है जबकि पार्टी के दो सांसदों शशि थरूर और मनीष तिवारी ने भारत की विदेश नीति का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने कहा कि इस जटिल स्थिति में भारत ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और समझदारी भरा रुख अपनाया है। शशि थरूर ने अपने एक लेख में भारत की 'चुप्पी' को सही ठहराते हुए कहा कि यह कोई नैतिक कमजोरी नहीं बल्कि जिम्मेदार कूटनीति का हिस्सा है। उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता के बीच संतुलन बनाकर चलता आया है। शशि थरूर ने लिखा, "गुटनिरपेक्षता का मतलब नैतिक रुख से दूर रहना नहीं था, बल्कि यह समझना था कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए बड़े वैश्विक टकरावों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।" उन्होंने कहा कि आज के दौर में भारत 'मल्टी-अलाइनमेंट' की नीति पर चल रहा है, यानी वह अलग-अलग वैश्विक ताकतों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देता है। उन्होंने यह भी माना कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सही नहीं है, लेकिन भारत की चुप्पी इसका समर्थन नहीं है, बल्कि यह एक सोच-समझकर लिया गया फैसला है। उन्होंने कहा, "सरकार का यह देखना कि किसी बयान का देश की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा, नैतिक समर्पण नहीं, बल्कि जिम्मेदार शासन है।" वहीं, मनीष तिवारी ने भी हाल ही में एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई संघर्ष चल रहे हैं और ऐसे में किसी एक पक्ष का समर्थन करना आसान नहीं है। मनीष तिवारी ने कहा, "यह भारत की लड़ाई नहीं है। हम इस क्षेत्र में हमेशा सीमित भूमिका में रहे हैं, इसलिए दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।" उन्होंने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का जिक्र करते हुए कहा कि अपने हितों की रक्षा करना और संतुलन बनाकर चलना ही सही नीति है। इधर, केंद्र सरकार की कथित चुप्पी और ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर देर से प्रतिक्रिया देने को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए एक खुला पत्र लिखा था। हालांकि, कांग्रेस के ही दो वरिष्ठ नेताओं द्वारा सरकार के रुख का समर्थन किए जाने से पार्टी के भीतर मतभेद साफ नजर आ रहे हैं। इससे विपक्ष के आरोपों की धार भी कुछ कमजोर होती दिख रही है। बता दें कि इससे पहले भी शशि थरूर और मनीष तिवारी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद केंद्र सरकार की कूटनीतिक पहल का समर्थन किया था।